रे मूर्ख प्राणी इतना क्यों इठलाता है रे मूर्ख प्राणी इतना क्यों इठलाता है रोते हुए आता है और रोते ही जाता है जब तू आया इस धरती पर, तबसे रू…
Read moreचांद की चांदनी से खूबसूरत है तू दिल को भाए वही ऐसी मूरत है तू सिवाय तेरे मन कहीं लगता नहीं मेरे ख्वाबों में तू और ख्यालों में त…
Read moreजिंदगी अब कुछ उलझी सी लग रही है। मुठ्ठी से रेत की तरह फिसलती सी लग रही है। जब तक मां थी उसके आंचल की छांव में सिमटी हुई थी। …
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