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मां के लिए दिल से




जिंदगी अब कुछ उलझी सी लग रही है। मुठ्ठी से रेत की तरह फिसलती सी लग रही है। जब तक मां थी उसके आंचल की छांव में सिमटी हुई थी। बिन मां के जिंदगी का एक कोना बंजर सी लग रही है। 

 "मां" शरीर से नहीं हो साथ मेरे, तुम्हारी सारी यादें मेरे दिल में रहती हैं। तुम्हें याद करके "मां" ये आंखें मेरी, सुबह से शाम तक नम रहती हैं । 

 जब मैं दफ्तर से घर आता हूं , मां तुम्हारी बहुत याद आती है। सब नज़र आते हैं, पर मां बस तू नज़र नहीं आती है। जब भी याद करता हूं मां, दिल तड़प उठता है, पर फिर ख्याल आता है, ये दिल भी तो तुम्हारा ही दिया है, जो मेरे सीने में धड़कता है । ‌‌ 

                     @अरुण पांडेय ******************************

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