तू है मुसाफिर काया कोठरी का
तू है मुसाफिर काया कोठरी का ।
एक दिन तो खाली करना पड़ेगा ।।
चाहे तू चाहे या तू न चाहे,
मर्जी तो तेरी न बिल्कुल चलेगी ।
नाम हरि का बनेगा सहारा,
नैया जब तेरी भंवर में फसेगी ।।
तू है मुसाफिर काया कोठरी का ।
एक दिन तो खाली करना पड़ेगा ।।
कर्तव्य तुझको सारे यहां हैं निभाने,
फसना नही तुझको सुन ले दीवाने ।
हरि नाम सुमिरन दौलत तेरी है ,
चाहे तू कितने ही करोड़ों कमाले ।।
तू है मुसाफिर काया कोठरी का ।
एक दिन तो खाली करना पड़ेगा ।।
@अरुण पांडेय
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