ऐ जिंदगी सुन ले ज़रा
तुझे तो मैं देख लूंगा
जो तू मुझे हर पल आजमाती है
मैं भी किसी से कम नहीं हूं
जहां तू है मैं भी वहीं हूं
फिर बार बार मुझे क्या आजमाती है
क्या तुझे मुझसे बैर है क्या
तुझे तो मैं देख लूंगा
तू मुझसे ज्यादा ताकतवर है
ये मैं जनता हूं
पर मैं भी कहां पीछे हटने वाला हूं
ये भी मैं मानता हूं
तू मुझसे आगे नहीं निकल पाएगी
मैं हारू या जीतूं फिर भी तू
लौट कर मेरे ही पास आयेगी
मेरे सिवाय तेरा ठिकाना है भी तो नहीं
मैं हूं तो तू है ये तू भी जानती हूं
फिर बार बार मुझे क्या आजमाती है
तू जो मुझे खट्टे मीठे पल दिखाती है
जिंदगी का हर पाठ जो पढ़ाती है
शायद तू मुझे खुद से आगे
देखना चाहती है
क्योंकि जहां मैं हूं तो तू है
ये तू भी जानती है
तो फिर आ क्यों न हम
मिलकर साथ चलें
दोस्त बनकर रहें
खुलकर जियें और खुल कर हंसे
शायद यही तो जिंदगी है
@अरुण पांडेय
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