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मां तो केवल मां होती है






मां तो केवल मां होती है
वो वात्सल्य की छांव होती है
इस शब्द में सृष्टि का रहस्य समाया है
मां अपने बच्चे की धूप में शीतल छाया है
उसकी गोद ही बच्चे की सारी कायनात होती है
मां तो केवल मां होती है
वो वात्सल्य की छांव होती है

अपने खून से सींचती है अपने बच्चे को
गर्भ में हर पल महसूस करती उस नन्हें को
वह खुद में ही एक न्नहें से जीव का सृजन करती है
मां तो केवल मां होती है
वो वात्सल्य की छांव होती है

अपने बच्चे की ऊंगली पकड़ कर चलना सिखाना
तोतली भाषाऔर उसके इशारे झट से समझ जाना 
तभी तो मां बच्चे की दुनियां में पहली गुरु होती है
मां तो केवल मां होती है
वो वात्सल्य की छांव होती है

 बच्चे से मां का रिश्ता सबसे नौ महीने ज्यादा है
नजर का टीका लगा कर बड़े  नाजों से पाला है
बच्चे उसका दिल तो, वो बच्चे की जान होती है
मां तो केवल मां होती है
वो वात्सल्य की छांव होती है

मां शब्द की अनुभूति सुखद है
वो है तो बड़ा से बड़ा गम भी लगता कम है
खुद का निवाला बच्चे को, खिलाकर खुश होती है
मां तो केवल मां होती है
वो तो वात्सल्य की छांव होती है

मां का ऋण कोई चुका नहीं सकता है
ईश्वर ने इसका स्थान अपने से ऊंचा रखा है
दिल न दुखे इसका,धन्य है वे जिनकी ये कोशिश होती है
मां तो केवल मां होती है
वो तो वात्सल्य की छांव होती है

@अरुण पांडेय
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