बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
एक वो दौर था जब हर एक खेल ,
के लिए दिन का चयन करना पड़ता था
एक ये दौर है जब सुबह उठते ही,
मोबाइल को ही नमन करना पड़ता है
बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
खो गया खो - खो,
और खो गई कबड्डी
अब तो रह गया यू ट्यूब,
और रह गया पब्जी
पहले बच्चे खेलते कूदते,
और करते थे शरारत
अब मोबाइल ही बन गई है,
सबसे बड़ी आदत
बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
ये तो अब हर घर की आदत,
और स्टाइल बन गया है
बच्चों के चेहरे की तो,
स्माइल बन गया है
बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
बच्चों को इसकी आदत,
हमनें ही लगाई है
फिर कहते हैं कि
ये आफत क्यों हमनें,
उनके हाथों में पकड़ाई है
बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
अब मोबाइल के इस्तेमाल,
से थोड़ा सजग रहना होगा
अब बच्चों को भी हमें खेलों,
के प्रति जागरूक करना होगा
बच्चों से खेल का मैदान,
अब कहीं खो सा गया है
खेल का मैदान अब सिमट,
कर मोबाइल हो गया है
@अरुण पांडेय
***********************************


0 Comments