वो यादें भी अजीब हैं

 पर लगती करीब हैं

 जी लेता हूं कुछ वो

 हसीन पल याद करके

वो भी क्या दिन थे 

सिर्फ मैं था और तू थी

 गुज़र गए वो हसीन लम्हें

टूट गई कसमें, 

 ये जिंदगी भी  कितनी 

लगती अजीब है

अब तू कहां और मै कहां ,

कहां है वो  वादें

जिंदगी में अब तू नहीं ,

बची हैं तो सिर्फ यादें


@अरुण पांडेय