Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

Self - Contemplation :आत्म चिंतन






हे मनुष्य! सोच जरा क्यों ,मिला तुझे ये जीवन

मन , बुद्धि,काया  मानों , हो कोई सुंदर उपवन

लाख चौरासी योनि है पर ,तूने क्यों पाया ये तन

सोच जरा तू  अंतर  मन से ,क्यों मिला तुझे ये जीवन

कोई तो कारण होगा जो, आया तु इस धरती पर

न व्यर्थ तु जाने दे इसको ,कर उपकार अपने ऊपर

कर सुमिरन तु परम पिता का,जो आया इंसा बनकर

भाग दौड़ की दुनिया,में कुछ तो समय निकालाकर

पूरे दिन के काल चक्र में, ईश्वर का ध्यान लगाया कर

नाम प्रभु का सुमिरन कर, हृदय मन्दिर में पाया कर

कर्म योगी हो कर्म करो, सुख दुख में सम रहना

अडिग धर्म पे अपने रहकर, जीवन तुम जीते रहना


@अरुण पांडेय

Post a Comment

0 Comments