सूरज की किरणें जब, धरती पर पड़ती हैं नभ से
नई सुबह के संग आस सी, जग जाती है मन में
बीती बातों को भूल कर, आगे बढ़नें की बेला है
जो है पीछे छूटे उनसे ,अब तुझको क्या लेना है
शोक मनाने से क्या होगा, जो बीत गई उन बातों का
नई सुबह का कर तू स्वागत, क्या करना उन रातों का
धैर्य, हौसला कर तू धारण, कर त्याग तुच्छ विचारों को
अपनें रक्षक स्वयं बनों तुम, स्वीकारों उन बाधाओं को
जय, पराजय की चिन्ता छोड़ो, डटे रहो अपने पथ पर
एक दिन मंजिल तेरे आगे होगी, रख भरोसा तू खुद पर
खुद की आरजू खुद को सौंप ,चल पड़ हर बाधा रौंद के
उतार चढ़ाव ही जिंदगी है, तू जी ले इसे ही बिना खौफ के
@अरुण पाण्डेय
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